'लोक सुधार के बजाय यमलोक सिधार…', कांग्रेस ने साधा BJP पर निशाना, आत्‍महत्‍या के लिए कर रही मजबूर



नई दिल्ली
कांग्रेस ने रविवार को बीजेपी सरकार पर लोगों को “आत्मघाती अवसाद” से ग्रस्त होने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया। इसके साथ ही (एनसीआरबी) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 2014 से अब तक कुल 9.52 लाख लोग सुसाइड कर चुके हैं।

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने एक बयान में कहा कि रिपोर्ट के अनुसार आत्महत्या करने वाले छात्रों की संख्या में 55 प्रतिशत, ऐसे बेरोजगारों की संख्या में 58 प्रतिशत और किसानों, मजदूरों तथा दिहाड़ी मजदूरों की संख्या में 139.37 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

उन्होंने कहा, ‘2014 से 2020 के बीच पिछले सात साल के दौरान मोदी सरकार की नाकाम और संवेदनहीन नीतियों से 9,52,875 भारतीय आत्महत्या करने को मजबूर हुए।’ उन्होंने कहा, “आज सरकार अपनी नाकाम जनविरोधी नीतियों को छुपाने की कोशिश में लोगों के बीच विभाजन, नकारात्मकता, निराशा को बढ़ावा दे रही है।”

सुरजेवाला ने कहा कि इतने खराब आंकड़ों के बावजूद सत्ता के प्रति भाजपा की ‘ललक’ बनी हुई है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े “डरावने और दिल दहला देने वाले” हैं।

केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत आने वाले राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ने पिछले महीने ‘भारत में आत्महत्या और दुर्घटना से होने वाली मौतें’ शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की थी।

सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि समाज के हर तबके के तरक्की के अवसरों को मोदी सरकार ने अवसाद में तब्दील कर दिया है। उन्होंने कहा, “बेरोजगारी की निराशा, महंगाई, फसलों की बढ़ती कीमतों और समग्र अनिश्चितता का सामना करते हुए देश के लोग आत्महत्या का विकल्प चुनकर मौत को गले लगा रहे हैं।’

कांग्रेस नेता ने कहा कि गृहिणियां लगातार महंगाई का खामियाजा भुगत रही हैं और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने दावा किया कि महंगाई और रोजगार के अवसरों की कमी घरेलू कलह के मुख्य कारण हैं और इस वजह से गृहिणियां आत्महत्या का रास्ता चुन रही हैं।

उन्होंने कहा, “एनसीआरबी आंकड़े लोक सुधार के बजाय सरकार की यमलोक सिधार तस्वीर दिखाते हैं।’ उन्होंने कहा कि सरकार की “किसान विरोधी” नीतियों के कारण 2019 से 2020 तक किसान आत्महत्याओं में 19 प्रतिशत की वृद्धि हुयी।

सुरजेवाला ने कहा कि देश का भविष्य अंधकारमय है और उन्होंने इस दावे का समर्थन करने के लिए 2014 से 2020 के बीच 69,407 छात्रों की आत्महत्या का जिक्र किया।



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