डिप्टी कमिश्नर ने प्राईवेट अस्पतालों में आक्सीजन के इस्तेमाल की निगरानी के लिए 2 आडिट टीमों का गठन किया

कहा, इस कदम का उद्देश्य जीवन रक्षक गैस के सही प्रयोग को सुनिश्चित करना

ज़िले में ग़ैर -चिकित्सक संस्थानों को आक्सीजन की स्पलाई पर पूरी पाबंदी लगाने के लिए कहा

जालंधर- सभी स्वास्थ्य संभाल संस्थानों में आक्सीजन गैस की माँग और स्पलाई को और उचित बनाने के लिए डिप्टी कमिश्नर घनश्याम थोरी ने मंगलवार को दो आडिट टीमों का गठन किया, जो प्राईवेट अस्पतालों में आक्सीजन के इस्तेमाल की निगरानी करेंगी।

                इस बारे में और ज्यादा जानकारी देते हुए डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि पहले आडिट टीमों का गठन सिविल अस्पताल के लिए किया गया था, जिन्होंने आक्सीजन खर्च के सभी पहलुओं की पूरी तरह पड़ताल करने के बाद इस जीवन रक्षक गैस के सही प्रयोग के लक्ष्य को हासिल किया। अब सभी प्राईवेट अस्पतालों में आक्सीजन का आडिट करवाने के लिए 2 और टीमों का गठन किया गया है। पहली टीम में एस.एम.ओ. बुंडाला डा. अशोक कौल, एस.एम.ओ. तलवंडी संघेड़ा डा. गुरप्रीत सिंह, ई.टी.ओ. नीरज कुमार ,जबकि दूसरी टीम में एस.एम.ओ. करतारपुर डा. कुलदीप, एस.एम.ओ. भोगपुर डा. परमिन्दर और ई.टी.ओ. हरजोत सिंह बेदी को शामिल किया गया है।

                डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि यह दोनों टीमें आक्जीन के तार्किक प्रयोग सहित इन अस्पतालों में आक्सीजन गैस की माँग और इस्तेमाल की निजी तौर पर निगरानी करेंगी। उन्होनें आगे कहा कि टीम के सदस्यों को कोविड केयर सुविधाओं में माँग, स्पलाई और इस्तेमाल के बारे में आडिट की रोज़ाना की रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा गया है। डिप्टी कमिश्नर ने आगे बताया कि अब जिले में ग़ैर -चिकित्सक संस्थानों को आक्सीजन स्पलाई करने पर पूरी तरह पाबंदी है और पुलिस आधिकारियों को आक्सीजन गैस की कालाबाजारी और जमाख़ोरी ख़िलाफ़ सख़्त कार्यवाही को यकीनी बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

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